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सांकेतिक भाषा बधिरों की ही नहीं, सभी की भाषा बने: राज्यपाल

-नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्थानीय भाषा के अलावा, सांकेतिक भाषा को सीखने और सिखाने पर बल
अभिनव इंडिया/परमेंद्र कौशिक
गुरुग्राम।
हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्थानीय भाषा के अलावा, सांकेतिक भाषा अर्थात् साइन लैंग्वेज सिखाने व सीखने पर बल दिया गया है। यह सांकेतिक भाषा केवल बधिरों की ही नही बल्कि सभी की भाषा बने। राज्यपाल गुरुग्राम के श्रवण एवं वाणी निशक्तजन कल्याण केन्द्र का अवलोकन करने आए थे। उन्होंने इस केन्द्र में दो परियोजनाओं नामत: बहुउद्देश्यीय हॉल तथा प्रथम तलीय स्कूल विंग का उद्घाटन तथा ‘नींव आधार भवन‘ का शिलान्यास किया। बहुउद्देश्य हॉल का नाम केन्द्र के संस्थापक डा. बी एन चक्रवर्ती के नाम पर रखा गया है। राज्यपाल ने डिजीटल साईन लैंग्वेज लैब तथा अर्ली इंटरवेंशन सैंटर का भी निरीक्षण किया और इनकी मदद से श्रवण एवं वाणी निशक्तजनों को दी जा रही शिक्षा के बारे में जानकारी हासिल की। वहीं केन्द्र में शिक्षारत विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए उत्पादों की प्रदर्शनी को भी देखा। 
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मूक-बधिर निशक्तजनों को नई उम्मीद जगाई है। उन्होंने आईएसएल अर्थात् इंडियन साइन लैंग्वेज को भाषा के रूप में मान्यता देकर बधिर लोगों के कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया है। केन्द्र सरकार द्वारा दिव्यांगजनों के हितों का ध्यान रखते हुए कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू की गई हैं। जिनके तहत उन्हें कौशल विकास में प्रशिक्षण देने के साथ साथ माइक्रो लोन स्कीम में लाभ दिलवाया जा रहा है। इसके अलावा, नौकरियों में दिव्यांगजनों को दिए जाने वाले आरक्षण को भी तीन प्रतिशत से बढ़ाकर चार प्रतिशत किया गया है। उन्हें पेंशन भी दी जा रही है।
राज्य सरकार व केन्द्र सरकार की निशक्तजनों के लिए बनाई गई योजनाओं का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि हरियाणा सरकार ने केन्द्र सरकार की योजनाओं को प्रदेश में बेहतर तरीके से क्रियान्वित करते हुए लागू किया है। इतना ही नही, सरकार द्वारा 18 वर्ष तक स्कूल ना जाने वाले दिव्यांगजनों को 1900 रूपये की मासिक वित्तीय सहायता दी जा रही है। इससे पहले गुरूग्राम के मूक-बधिर निशक्तजन कल्याण केन्द्र के चेयरमैन एवं उपायुक्त डा. यश गर्ग ने राज्यपाल का स्वागत करते हुए कहा कि इस केन्द्र की नींव 1971 में तत्कालीन राज्यपाल डा बी एन चक्रवर्ती ने रखी थी। इन पिछले 50 वर्षों में इस केन्द्र में दिन-प्रतिदिन तरक्की व उन्नति के नए प्रयोग हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए गर्व का विषय है कि देश की पहली डिजीटल साईन लैंग्वेज लैब गुरुग्राम में स्थापित की गई है। जिसके माध्यम से दिव्यांग बच्चों के अभिभावकों को साईन लैंग्वेज सिखाई जा रही है। अब तक लगभग 8 लाख लोग इससे लाभांवित हुए हैं। इस केन्द्र में साईन लैंग्वेज में उच्चतर शिक्षा देने की भी योजना है।
इस अवसर पर हरियाणा वैलफेयर सोसायटी फॉर पर्सनस विद् स्पीच एंड हियरिंग एम्पेयरमेंट की वाइस प्रैजीडैंट एवं चेयरपर्सन डा. शरणजीत कौर ने कहा कि साईन लैग्वेंज का हमारे जीवन में महत्वपूर्ण रोल है। उन्होंने कहा कि गुरूग्राम के इस केन्द्र में पिछले 3 वर्षों से सांकेतिक भाषा को एक विषय के रूप में पढ़ाया जा रहा है जबकि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में अभी इसके बारे में सोचा जा रहा है। कार्यक्रम में केन्द्र के विद्यार्थियों ने लघु नाटिका की प्रस्तुति भी दी जिसे उपस्थित दर्शकों ने खूब सराहा। इस मौके पर केन्द्र के बधिर प्रशिक्षक दीपक द्वारा बनाई गई बंडारू दत्तात्रेय की पेंटिंग भी भेंट की गई। इस अवसर पर गुरूग्राम की एसडीएम अंकिता चौधरी, संस्था के एग्जीक्यूटिव मैम्बर शरद गोयल, केन्द्र की असिस्टेंट डायरेक्टर डा. सीमा, डीसीपी दीपक सहारण, एसीपी प्रीतपाल सांगवान सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे। 
 

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