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विविध फसलों की खेती करने के लिए क्लस्टर फार्म की हो स्थापना : डा. सुरेश अहलावत

अभिनव इंडिया/वेद वशिष्ठ

गुडग़ांव। केंद्र प्रदेश सरकारें किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई योजनाएं भी चला रही हैं और इसका लाभ किसानों को मिल भी रहा है। सरकार किसानों को विविध फसलों की खेती करने के लिए भी प्रोत्साहित कर रही है। सरकार का कहना है कि किसान चावल, गेहूं की खेती कम कर विविध फसलों की खेती करें, ताकि उनकी आर्थिक स्थिति और भी अधिक मजबूत हो सके। अभी इस पर मंथन चल रहा है। उधर, सामाजिक संस्था चौधरी शेर सिंह मैमोरियल शांति देवी चेरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष डा. सुरेश अहलावत का कहना है कि प्रदेश सरकारें पंजाब, हरियाणा पश्चिमी उत्तरप्रदेश के कृषि बाहुल्य क्षेत्र के किसानों से आग्रह कर रही है कि चावल, गेहूं की खेती कम की जाए और इसके स्थान पर अन्य फसलों की खेती की जाए ताकि उनकी आर्थिक स्थिति और मजबूत हो सके और खेती योग्य जमीन और अधिक उपजाऊ हो सके। डा. अहलावत का कहना है कि सरकार की इस योजना का असर पंजाब एंड हरियाणा के किसानों पर पड़ेगा। उनका सुझाव है कि सरकार 4-5 गांवों पर क्लस्टर फार्म की स्थापना करे और इस फार्म को डॉमेस्टेशन फार्म बनाया जाए और किसानों को फार्म में ले जाकर वस्तुस्थिति से अवगत कराया जाए। यानि कि उन्हें विभिन्न फसलों का प्रदर्शन भी दिखाया जाए और उसके बारे में पूरी जानकारी दी जाए। जिससे यह पता चल सके कि गेहूं चावल की फसल के अलावा अन्य फसल भी किसान बो सकते हैं। उनका कहना है कि प्रदेश में अंडर ग्राउण्ड वाटर इस्तेमाल करने लायक नहीं रहा है। क्योंकि चौया ऊपर गया है। ऐसे में  विभिन्न फसल की खेती करना आसान नहीं है। किसान उसी फसल की खेती कर सकते हैं, जो यहां पर होती है। उनका कहना है कि किसानों की आर्थिक दशा सुधारने के लिए सरकार समय-समय पर आर्थिक राशि भी देकर किसानों को प्रोत्साहित करती रही है। लेकिन ऐसा कब तक चलेगा। किसान अपनी इच्छा मांग के अनुसार ही फसलों की खेती करते आए हैं और आगे भी करते रहेंगे। सरकार को अपनी इस योजना पर पुनर्विचार करना चाहिए और डॉमेस्टे्रशन फार्म की व्यवस्था अवश्य करनी चाहिए, ताकि किसान विविध फसलों की पूरी जानकारी लेकर इस दिशा में कार्य कर सकें।

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