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सादगी से मनाए ईद-उल-अजहा का त्योहार: नाजिया अंसारी

अभिनव इंडिया/अभिनव अग्रवाल

नजीबाबाद। ईद-उल-अजहा या ईद-उल-जुहा यानि बकरीद  इस साल 17 जून सोमवार को मनाई जाएगी। युवा समाजसेवी व पत्रकार नाजिया अंसारी ने  सभी से अपील की ईद-उल-अजहा का त्योहार आपसी भाईचारे के साथ सादगी से मनाए। कुर्बानी के बाद अवशेष इधर-उधर ना फेंके व खून नालियों में न बहाए। एक दूसरे की भावनाओं का ख्याल रखें। उन्होंने बताया की बकरीद इस्लाम के सबसे पवित्र त्योहारों में एक है। इस्लाम में साल भर में दो ईद मनाई जाती हैं। एक को 'मीठी ईदÑ कहा जाता है और दूसरी को 'बकरीद। ईद का त्योहार सबसे प्रेम करने का संदेश देता है, तो बकरीद अपना कर्तव्य को निभाने और अल्लाह पर विश्वास रखने  व कुर्बानी का दिन भी होता है। बकरीद इस्लामी कैलेंडर के 12वें महीने धू अल-हिज्जा के 10वें दिन मनाया जाता है।

कुर्बानी की शुरुआत कैसे हुई:

बकरीद पर कुर्बानी (बलिदान) की प्रथा का आरंभ इस्लाम धर्म में हजरत इब्राहीम (अब्राहम) की एक महान बलिदान कथा से होता है। कहानी के अनुसार, अल्लाह ने हजरत इब्राहीम की परीक्षा लेने के लिए उन्हें उनके सबसे प्रिय बेटे इस्माइल को कुर्बान करने का आदेश दिया। इब्राहीम ने अल्लाह के आदेश का पालन करने के लिए अपने बेटे की कुर्बानी देने का निर्णय लिया। लेकिन अल्लाह ने उनकी निष्ठा और समर्पण को देखकर इस्माइल को बचा लिया और उसकी जगह एक मेमने की कुर्बानी दी गई। इस घटना की याद में ही हर साल बकरीद पर मुसलमान जानवरों (जैसे बकरा, भेड़ ) की कुर्बानी करते हैं।

युवा समाजसेवी नाजिया अंसारी ने बताया कि हजरत इब्राहीम की कुर्बानी की कथा से प्रेरित होकर, यह त्योहार मुसलमानों को धार्मिकता, समर्पण, और सामाजिक समानता के महत्व की याद दिलाता है। इस दिन की गई कुर्बानी गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करती है और पूरे मुस्लिम समुदाय को एकता के बंधन में बांधती है। 

बकरीद की खासियत:

धार्मिक समर्पण और निष्ठा  बकरीद का त्योहार हजरत इब्राहीम की धार्मिक निष्ठा और अल्लाह के प्रति उनकी समर्पण की याद दिलाता है। यह त्याग और बलिदान की भावना को बढ़ावा देता है।

समुदाय की सेवा:

कुर्बानी का मांस तीन हिस्सों में बांटा जाता है। जिनमें से एक हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों को दिया जाता है। वहीं दूसरा हिस्सा रिश्तेदारों और दोस्तों में व तीसरा हिस्सा खुद के परिवार के लिए रखा जाता है। इस प्रकार, यह त्योहार सामाजिक समानता और भाईचारे का प्रतीक है।

धार्मिक प्रार्थना और एकता व भाईचारे का प्रतीक:

बकरीद के दिन मुसलमान विशेष नमाज अदा करते हैं, जिसे ईद-उल-अज़हा की नमाज कहते हैं। यह सामूहिक प्रार्थना एकता और भाईचारे का प्रतीक है।

पवित्र यात्रा हज:

बकरीद हज यात्रा के साथ भी जुड़ा हुआ है, जो इस्लाम धर्म के पांच स्तंभों में से एक है। हज यात्रा के दौरान किए गए अनुष्ठानों का विशेष महत्व होता है और यह मुस्लिम समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक यात्रा है।

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