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हर्षोल्लास से मनाया अन्ना हजारे  का जन्मदिन

अभिनव इंडिया/सुरेंद्र कुमार
गुरुग्राम।
पद्मभूषण से सम्मानित समाजसेवी अन्ना हजारे का जन्मदिवस गुरुग्राम में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर अन्ना टीम के प्रदेश प्रमुख पीएल के प्रमुख पीएल कटारिया ने यहां मोर चौक पर स्थापित अन्ना हजारे की मूर्ती पर माल्यार्पण किया। वहीं मिठाईयां बांटी। इस अवसर पर कटारियां ने अन्ना हजारे द्वारा किए गए संघर्ष के बारे में लोगों को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि अन्ना हजारे का नाम किसन बाबूराव हजारे है। उनका जन्म 15 जून 1937 को सन् 1992 में भारत सरकार द्वारा उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था। वे सूचना के अधिकार के लिये कार्य करने वालों में प्रमुख थे।
जन लोकपाल विधेयक को पारित कराने के लिये अन्ना ने 16 अगस्त 2011 से आमरण अनशन आरम्भ किया था। 1965 के युद्ध में मौत से साक्षात्कार के बाद नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर उन्होंने स्वामी विवेकानंद की एक पुस्तक कॉल टु दि यूथ फॉर नेशन खरीदी। इसे पढक़र उनके मन में भी अपना जीवन समाज को समर्पित करने की इच्छा बलवती हो गई। उन्होंने महात्मा गांधी और विनोबा भावे की पुस्तकें भी पढ़ीं। 1970 में उन्होंने आजीवन अविवाहित रहकर स्वयं को सामाजिक कार्यों के लिए पूर्णत: समर्पित कर देने का संकल्प कर लिया। मुम्बई पदस्थापन के दौरान वह अपने गाँव रालेगन आते-जाते रहे। वे वहाँ चट्टान पर बैठकर गाँव को सुधारने की बात सोचा करते थे। 1978 में स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति लेकर रालेगन आकर उन्होंने अपना सामाजिक कार्य प्रारंभ कर दिया। इस गाँव में बिजली और पानी की ज़बरदस्त कमी थी। अन्ना ने गाँव वालों को नहर बनाने और गड्ढे खोदकर बारिश का पानी इक_ा करने के लिए प्रेरित किया और स्वयं भी इसमें योगदान दिया। अन्ना के कहने पर गाँव में जगह-जगह पेड़ लगाए गए। गाँव में सौर ऊर्जा और गोबर गैस के जरिए बिजली की सप्लाई की गई। उन्होंने अपनी जमीन बच्चों के हॉस्टल के लिए दान कर दी और अपनी पेंशन का सारा पैसा गाँव के विकास के लिए समर्पित कर दिया। 
1991 में अन्ना हजारे ने महाराष्ट्र में शिवसेना-भाजपा की सरकार के कुछ भ्रष्ट मंत्रियों को हटाए जाने की माँग को लेकर भूख हड़ताल की। जिस पर सरकार को दागी मंत्रियों को हटाना ही पड़ा। 
1997 में अन्ना हजारे ने सूचना का अधिकार अधिनियम के समर्थन में मुंबई के आजाद मैदान से अपना अभियान शुरु किया। 9 अगस्त 2003 को मुंबई के आजाद मैदान में ही अन्ना हजारे आमरण अनशन पर बैठ गए। 12 दिन तक चले आमरण अनशन के दौरान अन्ना हजारे और सूचना का अधिकार आंदोलन को देशव्यापी समर्थन मिला। आखिरकार 2003 में ही महाराष्ट्र सरकार को इस अधिनियम के एक मज़बूत और कड़े विधेयक को पारित करना पड़ा। बाद में इसी आंदोलन ने राष्ट्रीय आंदोलन का रूप ले लिया। इसके परिणामस्वरूप 12 अक्टूबर 2005 को भारतीय संसद ने भी सूचना का अधिकार अधिनियम पारित किया। अगस्त 2006, में सूचना का अधिकार अधिनियम में संशोधन प्रस्ताव के खिलाफ अन्ना ने 11 दिन तक आमरण अनशन किया, जिसे देशभर में समर्थन मिला। इसके परिणामस्वरूप, सरकार ने संशोधन का इरादा बदल दिया। 
कटारिया ने अन्ना टीम के समर्थकों से आहवान किया कि वे अन्ना हजारे द्वारा बनाए रास्ते पर चलकर देश को एक नई दिशा प्रदान करें। इस अवसर पर साहिल, शंभु, डीके, सुरेंद्र कुमार, राजकुमार, अजय शर्मा सहित शामिल रहे।
 

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