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हेल्थ

नारायणा ने दी 84 वर्षीया महिला को नई जिंदगी

-महिलाओं में स्ट्रोक के मामले ज्यादा
अभिनव इंडिया/रंजीता आर्या
नई दिल्ली।
गुरुग्राम के नारायणा अस्पताल में चिकित्सकों ने स्ट्रोक से पीडि़त 84 वर्षीया महिला का उपचार कर उसे नई जिंदगी दी है। महिला अब पूरी तरह से स्वस्थ है। इस अवसर पर पत्रकारों से बातचीत में नारायणा सुपरस्पेसैलिटी अस्पताल के फेसिलिटी डायरेक्टर डा. प्रतीक जैन, कंसल्टेंट न्यूरोलॉजी डा. साहिल कोहली व डा. तारिक मातिन, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरवेंशनल न्यूरोलॉजी ने स्ट्रोक के इलाज और जोखिम कम करने के बारे में अपने विचार व अनुभव साझा किये। उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले 84 वर्षीया कृष्णा टुटेजा को स्ट्रोक लगने पर नारायणा सुपरस्पेशेलिटी अस्पताल में लाया गया। क्लॉट निकालने के लिए उनको तुरंत थ्रोम्बोलिसिस के लिए भेजा गया। इलाज सफल रहा और अब वे सामान्य जि़ंदगी जी रही हैं। एक दूसरे केस में 27 वर्षीय एेश्वर्य के काम करने के दौरान अचानक शरीर का बायां हिस्सा सुन्न पड़ गया था, उन्हें भी आधे घंटे के अंदर अंदरनारायणा सुपरस्पेशेलिटी अस्पताल में लाया गया। उनके केस में क्लॉट निकालने के लिए दवाओं के साथ साथ सर्जरी की भी जरूरत थी, उनका भी इलाज सफल रहा। अब वे भी सामान्य जिंदगी जी रहे हैं। उन्होंने बताया कि स्टडी के अनुसार 55 वर्ष के बाद की आयु के 5 में से 1 महिला व 6 में से 1 पुरुष को स्ट्रोक होने का जोखिम है। वहीं दूसरी स्टडी के अनुसार 1995 से 2012 तक स्ट्रोक के मामले में अस्पताल में भर्ती होने वाली 18 से 44 वर्ष तक की आयु की महिलाओं की संख्या में इजाफा हुआ है। ये आंकड़े इस बात को दर्शाते हैं कि किस तरह एक लम्बे समय के दौरान महिलाओं में स्ट्रोक का जोखिम बढ़ गया है। डा. कोहली ने कहा कि डायबिटीज से पीडि़त लोगों को चेत जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि स्ट्रोक बढ़ते मामलों के साथ हर चार में से एक व्यक्ति को स्ट्रोक होने का जोखिम है। स्ट्रोक को लेकर सही समय पर इलाज यानि गोल्डन पीरियड और स्वस्थ जीवनशैली बेहद जरूरी है, क्योंकि इस मामले ये ही सफल इलाज की राह तय करते हैं। 
 

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