• 03:16 am
news-details
धर्म-कर्म

पश्चिमी सभ्यता से बचाने के लिए बच्चों को संस्कारवान बनाएं :  आचार्य ज्ञान भूषण

-बच्चों को महापुरुषों के त्याग, तपस्या, संघर्ष के बारे में बताएं
अभिनव इंडिया/अजय शर्मा
नगीना।
आज के समय में बढ़ती पश्चिमी सभ्यता का प्रभाव को रोकने के लिए अपने बच्चों को संस्कारवान बनाएं। जिससे वे संस्कारवान बन देश के गौरव व विकास में चार चांद लगा सकें और देश के विकास में मील का पत्थर साबित हो सके। यह बात जैन मुनि वात्सल्य आचार्य 108 श्री ज्ञान भूषण महाराज रत्नाकर ने श्री दिगंबर जैन मंदिर नगीना के प्रांगण में मंगल प्रवचन करते हुए कही।
उन्होंने कहा माता-पिता की चरण वंदना व पूजा करने के पश्चात ही देव दर्शन करने के लिए मंदिर जाना चाहिए तभी देव दर्शन करने का पूर्ण फल प्राप्त होगा। आचार्य ने कहा कि आज के समय में बदलता परिवेश चिंता का विषय है। इसलिए बच्चों की दिनचर्या पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। बच्चों में ऐसे संस्कार पैदा करें कि वे बुजुर्गों का मान सम्मान करे। माता पिता की सेवा के साथ-साथ दादा दादी की सेवा करने के लक्ष्य को जीवन के प्रथम लक्ष्य में सम्मिलित करें। क्योंकि आज को जवान है वो एक दिन वृद्ध भी होगा। ये बात मनुष्य को अपने जीवन मे सदैव ध्यान रखनी चाहिए।क्योंकि ईश्वर भी तभी प्रसन्न होता तब अपने से बड़ों का सम्मान, आदर, सत्कार किया जाता है। उन्होंने कहा कि बच्चों में देश भक्ति की भावना हमेशा उत्पन्न रखे। महापुरुषों के जीवन के त्याग, तपस्या,संघर्ष, परिश्रम के बारे में बच्चों को हमेशा स्मरण कराते रहे। मनुष्य को हमेशा दीन दुखियों की सेवा करनी चाहिए तथा उनकी सेवा का भाव मन में होना चाहिए और सेवा के लिए तत्पर रहना चाहिए। 
इस अवसर पर दीदी भारती, ब्रह्मचारी भैया, समाजसेवी व पूर्व युवाध्यक्ष रजत जैन, राजकमल जैन, सुधीर जैन, महावीर जैन, राकेश जैन, कमला देवी, राहुल जैन, मीना जैन, राधिका जैन, राजू जैन, शीला जैन, सविता जैन, लक्ष्मी जैन, मोनी जैन, अनिल जैन सहित शामिल रहे।
 

You can share this post!

Comments

Leave Comments