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आस्था कुलश्रेष्ठ की पुस्तक पंखुडियां एहसास की का लोकार्पण

अभिनव इंडिया/अजय शर्मा
गुरुग्राम।
साहित्यकार आस्था कुलश्रेष्ठ की पुस्तक पंखुडियां एहसास की का लोकार्पण साहित्यकार लक्ष्मीशंकर वाजपेयी, श्रीनिवास त्यागी, राजेंद्र निगम, इंदु राज निगम, डा. चेतन आनंद, ममता किरण व डा. सविता उपाध्याय द्वारा किया गया। लक्ष्मीशंकर वाजपेयी ने पुस्तक के विषय में कहा कि आस्था की एक-एक रचना बहुत ही उम्दा हैं। धागा कविता, रिश्तों के ताने-बाने को लेकर लिखी गई ऐसी रचना है, जिसमें अभिधा लक्षणा व व्यंजना तीनों शब्द शक्तियों को एक साथ देखा जा सकता है। डा. सविता उपाध्याय ने पुस्तक के विषय मे कहा की 80 कविताओं के इस संग्रह की सभी कविताओं की पृष्ठभूमि में भिन्नता रोचकता, अलग-अलग शैली का होना आस्था कुलश्रेष्ठ के काव्य संग्रह को अमूल्य बना देता है। एहसास कविता में मां के चले जाने के बाद की मर्मस्पर्शी वेदना है। डा. श्रीनिवास ने कहा कि काव्य संग्रह में कवयित्री के अपने निजी एहसास हैं जो घर परिवार, समाज से जुडी हुई भावनाओं और मानवीय एहसासों को वाणी देते हुए नजर आते हैं। डा. चेतन आनंद ने कहा कि यह मानवीय भावनाओं से ओतप्रोत ऐसे एहसास हैं जो निजकाया से परकाया मे प्रवेश कर जाते हैं। राजेंद्र निगम ने काव्य संग्रह को एक मनोरम भावात्मक संग्रह करार दिया। कवयित्री इंदु राज निगम ने जहां आस्था की कई कविताओं का हवाला देते हुए यथार्थ का आईना बताया, वहीं ममता किरण ने कविताओं को पुरातन व अधुनातन वातारण का सुंदर साक्ष्य बताते हुए लेखिका के लेखन की सराहना की। कार्यक्रम का आयोजन अभिषेक कुलश्रेष्ठ द्वारा किया गया था। इस अवसर पर साहित्यकार, कवि, लेखक बड़ी संख्या में शामिल रहे। 
 

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