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शख्सियत

विश्वदीपक त्रिखा की रूबरू कार्यक्रम में दिखाई जीवनगाथा 

अभिनव इंडिया/परमेंद्र कौशिक
गुरुग्राम।
यहां नगर निगम के साथ मिलकर कला को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लंबे समय तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करने वाले नगर निगम के पूर्व सांस्कृतिक सलाहकार एवं हरियाणा मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर के उप-निदेशक रहे विश्वदीपक त्रिखा द्वारा कला, संस्कृति के क्षेत्र में दिए गए योगदान को लेकर रूबरू कार्यक्रम में उनकी जीवनगाथा का प्रसारण सोशल मीडिया पर किया गया। उत्तर क्षेत्र सांस्कृति केंद्र की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में त्रिखा ने अपने मुखारबिंद से अपने कला के सफर को सांझा किया। 
उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला की ओर से संस्कृति मंत्रालय के सौजन्य से कलाकारों को आर्थिक सहायता देने तथा कला को विस्तार देने के लिए नई उम्मीद, नई पहल ऑनलाइन कला महोत्सव का आयोजन करवाया जा रहा है। कला महोत्सव में सभी विधाओं के कलाकारों को अपना-अपना हुनर दिखाने का मौका दिया जा रहा है। वहीं कला महोत्सव में रूबरू कार्यक्रम के तहत कलाकारों को अपनी जीवन यात्रा सांझा करने का अवसर भी दिया गया। खास बात यह है कि इस कार्यक्रम में हरियाणा से अकेले विश्वदीपक त्रिखा का ही चयन किया गया। वहीं चंडीगढ़ से बलकार सिद्धू और जम्मू कश्मीर से मुश्ताक काक को जीवन यात्रा सांझा करने का मौका मिला। इसका प्रसारण उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला के फेसबुक पेज तथा यूट्यूब चैनल पर किया गया। 
हरियाणा में रंगमंच को दिलाई पहचान:
हरियाणा में रंगमंच को विशेष पहचान दिलाने में विश्वदीपक त्रिखा का अहम योगदान है। हरियाणा मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर कुरुक्षेत्र में हरियाणा के लोगों को भारतवर्ष के विभिन्न प्रदेशों के रंगकर्म से रूबरू करवाने का भी कार्य किया। इतना ही नहीं, प्रदेश के युवा कलाकारों में रंचमंच के लिए ललक पैदा करना सदा त्रिखा के एजेंडे में रहा। उन्होंने युवा प्रतिभाओं को आगे बढ़ाकर उचित मंच प्रदान किया। विश्वदीपक त्रिखा ने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय दिल्ली की ओर से आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय नाट्य समारोह भारंगम के सलेक्शन कमेटी के सदस्य व उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज की गवर्निंग बॉडी के सदस्य भी रह चुके हैं। उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक डा. सौभाग्यवर्धन के साथ हुए रूबरू कार्यक्रम के दौरान श्री त्रिखा ने अपनी रंगमंच की शुरुआत से लेकर गधे की बारात नाटक तक के सफर को रोचक अंदाज में सांझा किया। उन्होंने बतााया कि गधे की बारात नाटक के भारत और पाकिस्तान व अन्य क्षेत्रों को मिलाकर 150 से अधिक मंचन किए जा चुके हैं। उन्होंने दमदार तरीके से कहा कि वे जीवन पर्यन्त कला और कलाकारों को बढ़ावा देने में लगे रहेंगे। अपने भीतर के कलाकार को कभी मरने नहीं देंगे। 
 

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