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खेती

कौशल विकास से स्वावलंबी बने महिलाएं: डा. सैनी

अभिनव इंडिया/तेजवंत शर्मा
मंडकौला/पलवल।
कृषि विज्ञान केन्द्र, मंडकौला के बागवानी विशेषज्ञ डा. रणबीर सिंह सैनी ने महिलाओं से आहवान किया कि वे कौशल विकास से स्वावलंबी बनें। डा. सैनी कृषि विज्ञान केन्द्र, मंडकौला में पूर्व महिला प्रशिक्षणार्थियों के लिए आयोजित सम्मेलन में संबोधित कर रहे थे। इस सम्मेलन में 60 महिलाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में केन्द्र के वरिष्ठ समायोजक डा. धर्मवीर पाठक ने प्रतिभागियों का स्वागत किया और आहवान किया कि प्रशिक्षण लेने और देने वाले दोनों का उद्देश्य तभी पूर्ण होता है जब प्रशिक्षित व्यक्ति प्रशिक्षण लेने के बाद उस कार्य को बतौर रोजगार अपनाकर अपने परिवार के लिए आय उपार्जन का साधन बनाए। वहीं केन्द्र के बागवानी विशेषज्ञ डा. रणबीर सिंह सैनी ने कहा कि किसी भी व्यवसायिक विषय पर प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले व्यक्ति के इस सफर की शुरुआत से अंत तक तीन मुख्य अवस्थाएं होती हैं। जिनमें पहली अवस्था प्रशिक्षण प्राप्त करना, दूसरी प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद निरंतर कड़ी प्रैक्टिस करना जिससे वह उस कार्य को अंजाम देने में पूरी तरह निपुण व सक्षम हो जाए। दूसरी अवस्था को हैंड होल्डिंग स्टेज भी कहा जाता है। क्योंकि, इस दौरान प्रशिक्षण देने वाले विशेषज्ञों की देखरेख व मार्गदर्शन में समवैचारिक साथियों के हाथ से हाथ मिलाकर अभ्यास करते हुए मंजिल की ओर बढऩा होता है। प्रशिक्षित व्यक्ति के निपुण होने के साथ ही सफल सूक्षम उद्यमी के तौर पर पहचान बनाकर आय उपार्जन इस पूर्ण कड़ी की अंतिम अवस्था होती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को स्वावलंबी बनाना एेसे कार्यक्रमों का सर्वोपरि ध्येय होता है।
कार्यक्रम में यह सामने आया कि 60 प्रशिक्षित महिलाओं में से 18 महिलाएं ऐसी हैं जो स्वयं सहायता समूह बनाने की प्रक्रिया में हैं। इनमें मीनू, मीनाक्षी, रजनी व अचार, कैचअप एवं किन्नों का स्क्वैश के लिए, रामभतेरी, सविता, अनीता, महिलाओं व बच्चों के कपडे सिलाई के लिए मुख्य है। सभी महिलाओं ने एकमत जाहिर किया कि तैयार किये गये उप्पादों की बिक्री इनके सामने सबसे बड़ी समस्या व चुनौती है। इस संदर्भ में विशेषज्ञों ने विपणन संबंधी उपयोगी टिप्स दिये और ऐसे मंच बताए जिन के माध्यम से वे आसानी से अपने उत्पादों की बाजार में पहचान बना सकती हैं। कार्यक्रम के अंत में केन्द्र द्वारा कटाई-सिलाई व कोमल खिलौने बनाने  व फल-सब्जी प्रसंस्करण व अचार बनाने सम्बन्धी सामान रोजगार आरम्भ करने हेतु स्वरोजगार सहायता सामग्री के रुप में कृषि विज्ञान केन्द्र की ओर से दिया गया। जिसमें स्टील के विभिन्न बर्तन जैसे प्रैशर कूकर, पतीले, बाल्टी, कढ़ाई व जूसर-मिक्सर-ग्राइंडर तथा सिलाई कार्य के लिए बिजली चालित सिलाई मशीन, कैंची व प्रैस दिये गयेे।
 

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