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धर्म-कर्म

पर्युषण पर्व पर मांस-मदिरा की बिक्री पर प्रतिबंध लगाए प्रदेश सरकार: रजत

अभिनव इंडिया/अजय शर्मा
नगीना।
जैन धर्म के अनुयायियों ने पर्युषण पर्व पर प्रदेश सरकार से प्रयुषण पर्व पर मांस-मदिरा की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। सर्व जातीय सेवा समिति के उपाध्यक्ष व समाजसेवी रजत जैन का कहना है कि भाद्र पद मास के शुक्ल पक्ष पर्युषण पर्व को लेकर प्रदेश सरकार को चाहिए कि वह दशलक्षण पर्व में प्रदेश को 10 दिनों तक के लिए मांस-मदिरा मुक्त घोषित कर दे। 
रजत जैन ने बताया कि जैन धर्म के अनुयायियों में पर्युषण पर्व का विशेष महत्व हैं। इस पर्व में भक्तगण धार्मिक ग्रंथ माँ जिनवाणी के माध्यम से 10 धर्मों का भक्ति भाव से विशेष पूजा अर्चना आराधना, स्तुति,आरती, अध्ययन, करते हैं। अहिंसा के पथ पर चलकर देश व विश्व, की शांति, उन्नति, तरक्की, समृद्धि, विकास, आपसी प्रेम भाई चारा की कामना करते हंै तथा अहिंसा के पथ पर चलकर ही सच्ची शांति की कामना की जा सकती है। माँ जिनवाणी से सम्पूर्ण जगत के कल्याण की कामना करते है। प्रत्येक व्यक्ति प्राणी मात्र के प्रति दया भाव रखता है। ईश्वर से प्रार्थना करता है कि प्रत्येक, प्राणी मात्र एक दूसरे के प्रति, प्रेम ,आदर, व मैत्रीभाव के साथ रहे। जैन धर्म के जिओ और जीने दो के सिद्धांत को अपनाकर अहिंसा के मार्ग पर चलकर सच्ची शांति की कामना की जा सकती है। जैन धर्म का मूल उद्देश्य प्रत्येक प्राणिमात्र के प्रति मैत्रीभाव व दया भाव रखना है। जैन धर्म पूर्ण रुप से हिंसा के खिलाफ है। ईश्वर से प्रार्थना करता है कि प्रत्येक प्राणी मात्र एक दूसरे के प्रति प्रेम आदर व मैत्री भाव के साथ रहे। 
देश, प्रदेश व विश्व की जन कल्याण की भावना के साथ प्रदेश के मुख्यमंत्री व महामहिम राज्यपाल से मांग करते हैं कि 10 सितंबर से 19 सितंबर तक मनाये जानेवाले दशलक्षण पर्व में 10 दिनों के लिए मांस-मदिरा पर  प्रतिबंध लगाकर प्रदेश को मांस व मदिरा मुक्त घोषित किया जाए। जिससे अहिंसा के पथ पर चलकर विश्व कल्याण, शांति की स्थापना का सपना पूर्ण रुप से  साकार हो सके।
 

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