रोहतास प्लूमेरिया प्रोजेक्ट को मिलेगी नई रफ्तार, निर्णायक चरण में पहुंची सीआईआरपी
अभिनव इंडिया/योगी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के गोमती नगर स्थित रोहतास प्लूमेरिया प्रोजेक्ट के डेवलपर एंडीज टाउन प्लानर्स प्राइवेट लिमिटेड की कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (सीआईआरपी) अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। कई वर्षों से रुके इस प्रोजेक्ट को दोबारा शुरू करने के लिए एलजेके कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड और हलवासिया ग्रुप समेत कई कंपनियों ने रुचि दिखाई है। लंबे समय से अपने घर का इंतजार कर रहे होमबायर्स की उम्मीदें अब इस प्रक्रिया पर टिकी हैं। मार्च 2023 में कंपनी को इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) के तहत सीआईआरपी में भेजा गया था। शुरुआत में उम्मीद थी कि मामला तय समय में सुलझ जाएगा, लेकिन कानूनी विवाद, कर्जदाताओं से जुड़े मामलों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण रिजॉल्यूशन प्रक्रिया लगातार लंबी होती गई।
प्रोजेक्ट से जुड़ी जमीन, डेवलपमेंट राइट्स और कुछ कॉन्ट्रैक्ट्स को लेकर भी सवाल बने हुए हैं। इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि इन मुद्दों का समाधान नहीं हुआ तो रिजॉल्यूशन प्लान मंजूर होने के बाद भी निर्माण कार्य में देरी हो सकती है। जानकारी के मुताबिक, इस प्रक्रिया में शामिल कंपनियों की सिर्फ बोली राशि ही नहीं बल्कि उनकी वित्तीय स्थिति, फंडिंग क्षमता और बड़े प्रोजेक्ट पूरे करने के अनुभव का भी मूल्यांकन किया जा रहा है। बाजार से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इतने लंबे समय से अटके रियल एस्टेट प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए मजबूत वित्तीय आधार और कानूनी चुनौतियों को संभालने की क्षमता बेहद जरूरी है।
सार्वजनिक रिपोर्ट्स के अनुसार एलजेके कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ी कुछ संपत्तियों पर अलग मामलों में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई हुई है। वहीं हलवासिया ग्रुप से जुड़े अनंता टॉवर प्रोजेक्ट की कुछ संपत्तियों पर टैक्स अधिकारियों द्वारा अटैचमेंट की खबरें भी सामने आई हैं। इन मामलों का मौजूदा सीआईआरपी प्रक्रिया पर क्या असर पड़ेगा, यह आने वाले कानूनी और नियामकीय फैसलों पर निर्भर करेगा।
होमबायर्स के लिए सबसे बड़ा सवाल अभी भी यही है कि क्या चुनी गई कंपनी वास्तव में प्रोजेक्ट को पूरा कर पाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि रिजॉल्यूशन प्लान मंजूर होना सिर्फ शुरुआत होती है, असली चुनौती होती है फंड जुटाना, विवाद सुलझाना, सरकारी मंजूरियां लेना और तय समय में निर्माण पूरा करना। अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या एंडीज टाउन प्लानर्स का यह प्रोजेक्ट आखिरकार जमीन पर आगे बढ़ पाएगा या फिर मामला एक बार फिर देरी के चक्र में फंस जाएगा।
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