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तीन शर्तों पर अनशन खत्म करेंगे सोनम वांगचुक

-जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह को लिखा पत्र
गुड़गांव सामाजिक कार्यकर्ता और जलवायु चिंतक सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखते हुए अनशन समाप्त करने की सहमति जताई है। गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में भर्ती वांगचुक ने बुधवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह को पत्र लिखकर कहा कि यदि उनकी शर्तों पर सकारात्मक और स्पष्ट आश्वासन मिलता है तो वह अपना अनशन समाप्त करने के लिए तैयार हैं। इस घटनाक्रम के बाद आंदोलन के समाधान को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं।
अपने पत्र में सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार की पहल के लिए जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने मंगलवार देर रात मेदांता अस्पताल में हुई मुलाकात का भी जिक्र करते हुए कहा कि दोनों केंद्रीय मंत्रियों ने उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई और उनसे अनशन समाप्त करने का आग्रह किया था। इसके बाद उन्होंने अपनी तीन शर्तें सरकार के समक्ष रखी हैं।
वांगचुक ने अपनी पहली शर्त में नीट परीक्षा पेपर लीक मामले के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने इस पूरे मामले पर संसद में चर्चा कराने और दोषियों की जवाबदेही तय करने की बात कही है। इसके साथ ही उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर भी विचार किए जाने की मांग रखी है।
दूसरी शर्त के तहत वांगचुक ने 20 जुलाई को आयोजित "चलो संसद" मार्च में शामिल प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई या उत्पीडऩ नहीं किए जाने का आश्वासन मांगा है। उन्होंने कहा कि पुलिस कार्रवाई के बावजूद यह मार्च शांतिपूर्ण रहा था और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने वाले लोगों पर दंडात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
वहीं तीसरी शर्त में वांगचुक ने बताया कि विभिन्न राजनीतिक दलों के करीब 65 सांसदों ने उन्हें पत्र लिखकर देशहित में अनशन समाप्त करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि सांसदों ने भरोसा दिलाया है कि छात्रों की मांगों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को संसद में उठाया जाएगा। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह सहित कई सांसदों ने भी उनके आंदोलन को समर्थन देते हुए इस लड़ाई को आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया है।
इस बीच, मेदांता अस्पताल ने बुधवार शाम सोनम वांगचुक का हेल्थ बुलेटिन जारी किया। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, उनकी स्वास्थ्य स्थिति फिलहाल स्थिर बनी हुई है। उनका रक्तचाप और पल्स सामान्य है तथा वह पूरी तरह होश में हैं। हालांकि लंबे समय तक चले अनशन के कारण उनके शरीर में लाल रक्त कणिकाओं (आरबीसी), श्वेत रक्त कणिकाओं (डब्ल्यूबीसी) और प्लेटलेट्स की संख्या में कमी दर्ज की गई है। इसके अलावा शरीर में पोटेशियम का स्तर भी कम पाया गया है। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सुशीला कटारिया के नेतृत्व में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है।
अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था और सख्त:
वहीं, सोनम वांगचुक की सुरक्षा को देखते हुए मेदांता अस्पताल में थ्री-लेयर सिक्योरिटी व्यवस्था लागू की गई है। इसके बावजूद बुधवार दोपहर दो लोग पोस्टर लेकर अस्पताल परिसर के पार्क क्षेत्र में पहुंच गए और वांगचुक के समर्थन में प्रदर्शन करने लगे। सूचना मिलते ही पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हुईं और दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी गई।
पुलिस के अनुसार, दोनों की पहचान किशन दीक्षित और विकास यादव के रूप में हुई है। दोनों वाराणसी के निवासी बताए जा रहे हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वे अपने एक मरीज के इलाज के सिलसिले में अस्पताल आए थे। घटना के बाद अस्पताल परिसर की सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है। अब अस्पताल में प्रवेश करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की जांच और पहचान की पुष्टि के बाद ही अंदर जाने की अनुमति दी जा रही है।
सोनम वांगचुक के पत्र के बाद अब केंद्र सरकार के अगले कदम पर देश भर की नजरें टिकी हैं। यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक आश्वासन मिलता है तो लंबे समय से जारी उनका अनशन समाप्त हो सकता है।

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