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संसद और गुरुग्राम को बम से उड़ाने की धमकी से मचा हडक़ंप, सीजेपी प्रदर्शन की एफआईआर वापस लेने की मांग

गुड़गांव। दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के बाद दर्ज एफआईआर वापस लेने की मांग को लेकर जिला प्रशासन को धमकी भरी ईमेल मिलने से हडक़ंप मच गया है। ईमेल में गुरुग्राम के डीसी कार्यालय और जिला अदालत को बम से उड़ाने के साथ-साथ कई प्रतिष्ठित स्कूलों तथा देश की संसद को निशाना बनाने की धमकी दी गई है। धमकी मिलने के बाद जिला प्रशासन, गुरुग्राम पुलिस और खुफिया एजेंसियां अलर्ट मोड पर आ गई हैं।

यह ईमेल कथित तौर पर खालिस्तान नेशनल आर्मी के नाम से भेजी गई है। ईमेल में दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर जिला अदालत और डीसी कार्यालय में विस्फोट करने की धमकी दी गई है। वहीं, शहर के कई नामी स्कूलों को दोपहर 1 बजकर 11 मिनट पर बम से उड़ाने की बात कही गई है। सबसे गंभीर बात यह है कि ईमेल में 5 अगस्त को संसद भवन में बम विस्फोट करने की भी धमकी दी गई है, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है।

ईमेल में कहा गया है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान जिन छात्रों और युवाओं के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है, उन्हें तत्काल वापस लिया जाए। ऐसा नहीं होने पर देशभर में बम धमाकों के जरिए जवाब देने की चेतावनी दी गई है। धमकी भरे संदेश में यह भी दावा किया गया है कि भारत में अब सिलसिलेवार बम धमाके किए जाएंगे। धमकी मिलने के तुरंत बाद गुरुग्राम पुलिस ने डीसी कार्यालय, जिला अदालत और अन्य संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वायड की टीमों ने संबंधित परिसरों की गहन जांच शुरू कर दी है। संसद को दी गई धमकी के संबंध में दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों को भी तत्काल सूचित कर दिया गया है। सुरक्षा एजेंसियां ईमेल के स्रोत और उसकी तकनीकी जानकारी जुटाने में लगी हुई हैं।

यहां बतादें कि वर्ष 2026 में गुरुग्राम जिला प्रशासन को इस प्रकार की धमकी भरी ईमेल मिलने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी पांच से अधिक बार डीसी कार्यालय, स्कूलों, रेलवे स्टेशन, रेलवे लाइन, नगर निगम कार्यालय, मेयर कार्यालय, प्रधानमंत्री और हरियाणा के मुख्यमंत्री को धमकियां दी जा चुकी हैं। कुछ ईमेल में सतलुज-यमुना लिंक नहर विवाद का हवाला देते हुए हरियाणा में बम धमाकों की चेतावनी भी दी गई थी।

हालांकि, प्रत्येक मामले में पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई, लेकिन अब तक मुख्य आरोपियों तक पहुंच नहीं बनाई जा सकी है। पिछले दिनों पुलिस ने एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया था, जिस पर बांग्लादेश में प्रशासनिक संस्थानों और स्कूलों की ईमेल आईडी उपलब्ध कराने का आरोप था। उस समय पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच को आगे बढ़ाने और गिरोह तक पहुंचने का दावा किया था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आ सके हैं।

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