- चीन से रिश्ते सुधरने पर कारोबार और सप्लाई चेन को मिलेगी रफ्तार
- जापानी निवेश से हरियाणा-गुरुग्राम में बढ़ेंगे उद्योग और रोजगार के अवसर
गुड़गांव। रूस से ऊर्जा, चीन के साथ सीमा पर शांति और जापान से निवेश व अत्याधुनिक तकनीक—भारत की यह तीन स्तरीय रणनीति आने वाले समय में देश के उद्योग और कारोबार को नई गति दे सकती है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की चीन यात्रा को इसी बदलते आर्थिक और कूटनीतिक समीकरण के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताते हुए प्रोग्रेसिव फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन दीपक मैनी ने कहा कि तीनों देशों के साथ अलग-अलग क्षेत्रों में मजबूत सहयोग भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी स्थिति और मजबूत करने का अवसर देगा।
दीपक मैनी ने कहा कि चीन के साथ संबंधों में सुधार का सबसे बड़ा फायदा कारोबारी माहौल पर पड़ेगा। सीमा पर स्थायी शांति और बेहतर संवाद से दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों को स्थिरता मिल सकती है। वीजा, सीधी उड़ानों, कारोबारी आवाजाही और सप्लाई चेन से जुड़ी अड़चनें कम होने पर भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय कारोबार में फायदा होगा। इसका सीधा असर मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो कंपोनेंट, मशीनरी और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों पर पड़ सकता है।
रूस से ऊर्जा सहयोग उद्योग के लिए अहम:
उन्होंने कहा कि रूस के साथ भारत का ऊर्जा सहयोग भी उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है। ऊर्जा संसाधनों की बेहतर उपलब्धता और लागत में स्थिरता से मैन्युफैक्चरिंग, परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की लागत को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। इससे भारतीय उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ेगी।
जापान से निवेश और तकनीक बड़ा अवसर:
दीपक मैनी के अनुसार, जापान भारत के लिए निवेश और तकनीकी सहयोग का बड़ा स्रोत बन सकता है। सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, इंफ्रास्ट्रक्चर और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग में जापानी कंपनियों की भागीदारी बढ़ने से नई उत्पादन इकाइयां, सप्लाई चेन और रोजगार के अवसर तैयार होंगे।
हरियाणा और गुरुग्राम को मिल सकता है बड़ा फायदा:
उन्होंने कहा कि गुरुग्राम-मानेसर पहले से ऑटोमोबाइल, आईटी, इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स का प्रमुख औद्योगिक केंद्र है। बेहतर भारत-चीन कारोबारी संबंधों और जापानी निवेश में बढ़ोतरी से क्षेत्र में ग्लोबल कंपनियों की सप्लाई चेन मजबूत हो सकती है। इससे मैन्युफैक्चरिंग के साथ लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और सर्विस सेक्टर में भी नए निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी।
मैनी ने कहा कि गुरुग्राम की बेहतर कनेक्टिविटी, कॉरपोरेट इकोसिस्टम और मानेसर का औद्योगिक आधार इसे विदेशी निवेश के लिए मजबूत केंद्र बनाता है। यदि कूटनीतिक संबंधों को आर्थिक सहयोग में बदला जाता है तो भारत के साथ हरियाणा और गुरुग्राम के उद्योगों को भी इसका बड़ा लाभ मिल सकता है।
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