गुरुग्राम में भारी बारिश के बीच सनाथ रोड बनी मिसाल
-कम्प्लीट स्ट्रीट’ मॉडल ने दिखाया क्लाइमेट-रेडी इंफ्रास्ट्रक्चर का असर
गुड़गांव। साइबर सिटी गुडग़ांव में मंगलवार को हुई भारी बारिश ने कई इलाकों की रफ्तार थाम दी। शहर की प्रमुख सडक़ों पर जलजमाव के कारण ट्रैफिक प्रभावित हुआ और लोगों को घंटों परेशानियों का सामना करना पड़ा। हालांकि, इस बीच सनाथ रोड ने एक अलग मिसाल पेश की। यहां न तो सडक़ पर पानी जमा हुआ और न ही पैदल यात्रियों एवं साइकिल चालकों को किसी तरह की परेशानी हुई। साफ-सुथरे फुटपाथ और सुचारु जल निकासी व्यवस्था ने यह साबित कर दिया कि बेहतर योजना और आधुनिक सडक़ डिजाइन से जलभराव जैसी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
सनाथ रोड को गुरुग्राम की मॉडल कम्प्लीट स्ट्रीट के रूप में विकसित किया गया है। इस परियोजना को राहगिरी फाउंडेशन, गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (जीएमडीए), नगर निगम गुरुग्राम (एमसीजी) तथा अन्य सहयोगी संस्थाओं ने मिलकर तैयार किया है। सडक़ पर बायोस्वेल्स, रेन गार्डन, वैज्ञानिक ढलान, आधुनिक जल इनलेट और हरित क्षेत्र विकसित किए गए हैं, जो वर्षा जल को रोकने, उसकी गति कम करने और उसे जमीन में समाहित करने का कार्य करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, बायोस्वेल्स अपने आसपास आने वाले लगभग 80 प्रतिशत वर्षा जल को सोख लेते हैं, जबकि अतिरिक्त पानी को व्यवस्थित ड्रेनेज सिस्टम के माध्यम से बाहर निकाल दिया जाता है।
राहगिरी फाउंडेशन की फाउंडर ट्रस्टी सारिका पांडा भट्ट ने कहा कि मंगलवार को हुई बारिश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बाढ़ केवल अधिक वर्षा का परिणाम नहीं होती, बल्कि यह इस बात पर भी निर्भर करती है कि सडक़ें किस प्रकार डिजाइन की गई हैं। उन्होंने कहा कि सनाथ रोड पर पेड़, बायोस्वेल्स, जल इनलेट, सुरक्षित फुटपाथ, साइकिल ट्रैक और सुविचारित लैंडस्केप एक साथ मिलकर काम करते हैं। यदि शहरों की योजना प्रकृति के अनुरूप बनाई जाए तो सडक़ें समस्या नहीं, बल्कि समाधान बन सकती हैं।
वहीं, गुरुग्राम नगर निगम आयुक्त प्रदीप दहिया ने भी जलजमाव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए आधुनिक और टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर बल दिया। उनका कहना है कि उद्देश्य केवल मानसून के दौरान पानी निकालना नहीं, बल्कि शहर में जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित करना होना चाहिए।
बारिश के दौरान नरसिंहपुर, हीरो होंडा चौक, राजीव चौक, इफको चौक, ओल्ड दिल्ली रोड और सोहना रोड सहित कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति देखने को मिली, जबकि सनाथ रोड पूरी तरह सामान्य रही। यह सडक़ दिखाती है कि बेहतर शहरी डिजाइन, प्रभावी जल प्रबंधन और विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि गुरुग्राम सहित देश के अन्य शहरों में भी ‘कम्प्लीट स्ट्रीट’ मॉडल अपनाकर सुरक्षित, हरित और जलभराव मुक्त शहरी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा सकते हैं।
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