श्मशान घाट में परिवार की पांच चिताएं देख दहल उठा गुड़गांव
-दिल्ली अग्निकांड में खत्म हुआ अग्रवाल परिवार, मुखाग्रि देने वाला वारिस नहीं
गुड़गांव। दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल फ्लोरिश स्टे में लगी आग में जिंदा जले गुड़गांव के अग्रवाल परिवार के पांचों सदस्यों का वीरवार को सेक्टर-32 श्मशान घाट में नम आंखों के बीच अंतिम संस्कार कर दिया गया। एक साथ परिवार के पांच सदस्यों की मौत सेक्टर-46 से लेकर पूरे गुड़गांव में शोक की लहर है। हादसे में जान गंवाने वाले सीए विवेक अग्रवाल को उनके चचेरे भाई, पत्नी तर्जनी अग्रवाल को भाई, मां प्रेमलता अग्रवाल को देवर, और दोनों बेटियों जीविशा और वारिया को चचेरे भाइयों ने मुखाग्नि दी।
दिल्ली के एम्स में हुए पोस्टमार्टम के बाद सभी शवों को दोपहर गुड़गांव लाया गया। वहीं दोपहर करीब सवा तीन बजे श्मशान घाट पर अंतिम दर्शन के लिए जब एक साथ पांच चिताएं रखी गई तो वहां मौजूद हर शख्स का कलेजा कांप उठा। जैसे ही चिताओं को अग्नि दी गई, श्मशान घाट में मौजूद रिश्तेदारों और पड़ोसियों की चीत्कारों से पूरा माहौल गमगीन हो गया। वहां मौजूद लोग इस बात पर यकीन नहीं कर पा रहे थे कि पूरा का पूरा परिवार एक झटके में खत्म हो गया। हंसते-खेलते परिवार के सीए विवेक अग्रवाल, मिसेज इंडिया 2023 पत्नी तर्जनी, मां प्रेमलता और बेटियों जीविशा-वारिया का गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया।
होटल में लगी आग में झुलसा परिवार:
दरअसल, सेक्टर-46 के मकान नंबर 3169 में विवेक अग्रवाल अपनी पत्नी तर्जनी, मां प्रेमलता, पिता राधेश्याम अग्रवाल, बेटी जीविशा, बेटी वरिया, और बेटा रहते थे। पिता की तबीयत कई दिनों से अधिक खराब होने के कारण उन्हेंं साकेत के मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया था। सीए विवेक अग्रवाल परिवार समेत मालवीय नगर के होटल फ्लोरिश स्टे में रुके थे। वहीं बेंगलुरु में बीटेक कर रही बड़ी बेटी जीविशा दादा की खबर सुनते ही फ्लाइट से दिल्ली पहुंची थी। मंगलवार सुबह ब्रेकफास्ट के वक्त होटल में आग इतनी तेजी से फैली कि परिवार को संभलने का मौका तक नहीं मिला। दम घुटने और बुरी तरह झुलसने से परिवार व रिश्तेदार सहित आठ लोगों की मौत हो गई। जिनमें विवेक अग्रवाल, उनकी पत्नी तर्जनी अग्रवाल, मां प्रेमलता अग्रवाल, बेटी जीविशा अग्रवाल, वारिया अग्रवाल के अलावा विवेक का मामा अशोक पंसारी, मौसा रिटायर्ड बैंक अधिकारी जवरी लाल अग्रवाल और मौसी कमला अग्रवाल शामिल थे। सभी की दर्दनाक मौत से अब घर में सन्नाटा पसरा हुआ है। वहीं गुडग़ांव वासी भी गमगीन हैं।
वेंटिलेटर पर पिता को नहीं पता कि परिवार उजड़ गया:
अग्रवाल परिवार के मुखिया राधेश्याम अग्रवाल अभी भी मैक्स अस्पताल में वेंटिलेटर पर हैं। उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है। वहीं रिश्तेदारों ने सदमे के डर से उन्हें बेटे-बहू और पोतियों की मौत की खबर नहीं दी। राजस्थान से आए रिश्तेदार ही अंतिम संस्कार से लेकर सभी व्यवस्थाएं देख रहे हैं।
बेटियों को प्यार से एंजल-पर्ल कहकर बुलाते:
अग्रवाल परिवार में बड़ी बेटी जीविशा को एंजल और वारिया को पर्ल कहकर बुलाते थे। दोनों दादा राधेश्याम से बेहद जुड़ी थीं। पोतियों के लिए दादा की एक आवाज काफी थी। किसे पता था कि दादा से मिलने आई पोतियां खुद कभी नहीं लौटेंगी।
सूनी पड़ी कोठी, पड़ोसियों की आंखें नम:
हादसे के बाद से गुड़गांव के सेक्टर-46 स्थित विवेक अग्रवाल के घर पर सन्नाटा पसरा हुआ है और मुख्य गेट बंद हैं। पड़ोसियों का कहना है कि विवेक बेहद शालीन, हंसमुख और मदद के लिए हमेशा तैयार रहने वाले इंसान थे। पूरा सेक्टर इस बात से सदमे में है कि जो हंसता-खेलता परिवार दो दिन पहले अपनी गाड़ी से दिल्ली गया था, उसका एक सदस्य भी जिंदा नहीं बचा। पड़ोसी सतनारायण भारद्वाज बोले कि दो दिन पहले जो परिवार हंसते हुए गाड़ी से निकला था, उसकी एक साथ पांच अर्थियां उठीं। भरोसा नहीं होता। इस हादसे ने रिहायशी इलाकों और होटलों में फायर सेफ्टी के इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पड़ोसियों का कहना है कि परिवार बेहद मिलनसार था। विवेक-तर्जनी हमेशा मदद के लिए तैयार रहते थे।
बेटियों को बेंगलुरु से और रिश्तेदारों को राजस्थान से बुलाया:
पिता राधे श्याम की तबीयत खराब होने की जानकारी जब विवेक अग्रवाल ने अपनी बेटियों व रिश्तेदारों को दी तो बेटी जीविशा बेंगलुरू से दादा की तबीयत जानने के लिए फ्लाइट से दिल्ली आ गई। वहीं, मौसा रिटायर्ड बैंक अधिकारी जवरी लाल अग्रवाल और मौसी कमला अग्रवाल अजमेर से दिल्ली पहुंची थी। वहीं, मामा अशोक पंसारी किशनगढ़ से दिल्ली पहुंचे थे। यह सभी अस्पताल में विवेक के बीमार पिता राधेश्याम को मिलने के बाद होटल पहुंचे थे।
मिसेज इंडिया रह चुकी तर्जनी:
सीए विवेक अग्रवाल इंश्योरेंस देखो कंपनी में फाइनेंशियल हेड थे। जबकि उनकी पत्नी तर्जनी साल 2023 में मिसेज इंडिया का खिताब अपने नाम कर चुकी थी। वह मॉडलिंग भी कर रही थी। परिवार और अपने प्रोफेशन में तर्जनी ने ऐसा संतुलन बैठाया था कि वह पूरे परिवार की चहेती बनी हुई थी। वहीं, तर्जनी का इवेंट मैनेजमेंट का भी काम था तो साथ ही सामाजिक कार्यों के लिए उन्होंने एक गैर सरकारी संस्था बनाई हुई थी जिसके अंतर्गत वह वंचित बच्चों की मदद करती थी।
बेटियों को बचाने के लिए किए फोन:
खुद को आग की लपटों में घिरा देख विवेक अग्रवाल ने अपने मामा के बेटे को फोन किया और कहा कि हम आग की लपटों में घिरे हुए हैं और दम घुट रहा है। हम तो बच नहीं सकते, लेकिन बेटियों को बचा लो। जब तक उनके मामा का बेटा मौके पर पहुंचा तब तक सब कुछ खत्म हो चुका था। वहीं, तर्जनी ने भी अपने पिता को फोन किया और घबराते हुए बताया कि हम जिस होटल में ठहरे हुए थे उसमें आग लग गई है। जब तक तर्जनी के पिता मौके पर पहुंचे तब तक सब कुछ खत्म हो चुका था।
बेटी के उजड़ते परिवार को नहीं बचा पाए पिता:
प्रेम बंसल ने बताया कि उनकी बेटी तर्जनी की शादी गुड़गांव के सेक्टर-46 निवासी सीए विवेक अग्रवाल से हुई है। दो दिन पहले विवेक के पिता राधेश्याम अग्रवाल की तबीयत खराब हो गई थी, जिसके बाद उन्हें दिल्ली के मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बुधवार सुबह बेटी का फोन आया, जिसने घबराकर बताया-हम जिस होटल में ठहरे थे उसमें आग लग गई है। जब प्रेम बंसल होटल पहुंचे यहां चारों तरफ आग की लपटें थीं। वे बदहवास हो गए। थोड़ी देर में साफ हो गया कि उनकी बेटी-दामाद के परिवार में कोई जिंदा नहीं बचा। विवेक-तर्जनी की दोनों बेटियां एंजल व पर्ल, विवेक की मां प्रेमलता अग्रवाल, मामा अशोक पंसारी, मौसा जवरी लाल व मौसी कमला सब हादसे का शिकार हो गए। मामाजी किशनगंज से आए थे जबकि मौसा-मौसी अजमेर से आए थे।
मार्बल कारोबारी मामा और रिटायर्ड बैंक अधिकारी मौसा:
अजमेर के गुलाब बाड़ी निवासी रिटायर्ड बैंक अधिकारी मौसा जवरी लाल अग्रवाल (70) और मौसी कमला अग्रवाल (68) के साथ मंगलवार शाम 7 बजे अजमेर से किशनगढ़ गए। फिर किशनगढ़ से दिल्ली गए थे। किशनगढ़ की लक्ष्मीनारायण कॉलोनी निवासी मार्बल व्यापारी और विवेक के मामा अशोक पंसारी भी उनके साथ थे।
एक जून को पत्नी के साथ मनाया था जन्मदिन:
जवरी लाल के पड़ोसी और दोस्त राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि कमला अग्रवाल का 1 जून को जन्मदिन था। जवरी लाल ने इसे सभी के साथ मनाया था। उनके एक बेटा और एक बेटी हैं। बेटा सचिन अग्रवाल अमेरिका में गूगल कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। वह 5 साल से पत्नी और बच्चे के साथ अमेरिका में ही रह रहा है। बेटी दीपा की शादी साल 2012 में हनुमानगढ़ में हुई थी। वह जयपुर में रह रही है। हादसे की सूचना पर दीपा दिल्ली पहुंच गई। वहीं सचिन भी अमेरिका से निकल चुका है।
टहलने के लिए अब किसका साथ मिलेगा:
एक साथ परिवार के पांचों सदस्यों की मौत से पूरे मोहल्ले में मातम पसरा है। विवेक अग्रवाल के पड़ोसी सतनारायण भारद्वाज और सुशीला भारद्वाज का रो-रोकर बुरा हाल है। सुशीला भारद्वाज ने रुंधे गले से बताया कि प्रेमलता उनकी पक्की सहेली थी। रोज शाम को हम दोनों साथ सैर पर जाते थे। सुख-दुख बांटते थे। कल तक जो हंस-बोल रहा था, आज उसकी अर्थी उठ रही है। यकीन नहीं होता। पड़ोसियों के मुताबिक विवेक बहुत मिलनसार और मददगार स्वभाव के थे। बच्चे जीविशा और वारिया को कॉलोनी में सब प्यार करते थे। एक झटके में पूरा हंसता-खेलता परिवार खत्म हो गया।
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