ग्रीनहाउस गैसों का बढ़ता उत्सर्जन पश्चिमी हिमालय के लिए खतरे की घंटी
-सबसे तेजी से पिघलेगी बर्फ
नई दिल्ली। कोयला, पेट्रोल और डीजल जैसे जीवाश्म ईंधनों के लगातार बढ़ते इस्तेमाल से वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों का स्तर बढ़ रहा है और इसका सबसे बड़ा असर अब हिमालय की ऊंची चोटियों पर दिखाई देने लगा है। एक नए वैज्ञानिक अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि यदि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में तेजी से कमी नहीं लाई गई तो पश्चिमी हिमालय इस सदी के अंत तक सबसे ज्यादा बर्फ खोने वाला क्षेत्र बन सकता है। शोध के मुताबिक लद्दाख, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में तापमान मध्य और पूर्वी हिमालय की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ रहा है, जिससे ग्लेशियरों और मौसमी बर्फ के तेजी से पिघलने का खतरा बढ़ गया है।
जर्नल ऑफ अर्थ सिस्टम साइंस में प्रकाशित इस अध्ययन को बीआईटी मेसरा, भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) और अशोका विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने मिलकर तैयार किया है। शोध में 1901 से 2020 तक के 120 वर्षों के तापमान रिकॉर्ड और आठ वैश्विक जलवायु मॉडलों का विश्लेषण किया गया। इसके आधार पर वर्ष 2100 तक अलग-अलग उत्सर्जन परिदृश्यों में हिमालय के तापमान और बर्फ में होने वाले बदलावों का आकलन किया गया।
अध्ययन में पाया गया कि पश्चिमी हिमालय में सर्दियों के दौरान तापमान सबसे तेजी से बढ़ रहा है। दिन की तुलना में रात का तापमान अधिक बढ़ने से बर्फ के जमने का समय कम हो रहा है और पिघलने की प्रक्रिया तेज हो रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि मौजूदा दर से उत्सर्जन जारी रहा तो 2081-2100 के दौरान पश्चिमी हिमालय की सर्दियां 1900 के शुरुआती वर्षों की तुलना में 7.18 डिग्री सेल्सियस तक अधिक गर्म हो सकती हैं। इसके साथ ही बसंत के मौसम में बर्फ का नुकसान कम उत्सर्जन वाले परिदृश्य की तुलना में करीब तीन गुना अधिक होने का अनुमान है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, हिमालय के 15 हजार से अधिक ग्लेशियर सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों को पानी उपलब्ध कराते हैं, जिन पर करीब 1.5 अरब लोगों की जल सुरक्षा निर्भर है। ऐसे में बढ़ता तापमान केवल पहाड़ों तक सीमित समस्या नहीं है, बल्कि इसका असर खेती, पेयजल, जलविद्युत परियोजनाओं और बाढ़ के खतरे पर भी पड़ेगा। वैज्ञानिकों ने ग्लेशियरों की लगातार निगरानी, मजबूत प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में तेजी से कमी लाने की जरूरत पर जोर दिया है।
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