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सरकार इ-मोबिलिटी को बढ़ावा देना चाहती है: मेघवाल

अभिनव इंडिया/परमेंद्र कौशिक
गुरुग्राम।
केंद्रीय भारी उद्योग एवं संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि भारत सरकार इ-मोबिलिटी को बढ़ावा देना चाहती है। सरकार की ओर से वर्तमान बजट में फैब इंडिया के लिए 10,000 करोड़ के बजट का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की सभी बड़ी कंपनियों को अलग-अलग क्षेत्रों में इलेक्ट्रिकल चार्जिंग स्टेशन की स्थापना करने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को न्यू टेक्नोलॉजी अडॉप्ट करने की दृष्टि से और भी अन्य प्रकार के सहयोग केंद्र सरकार की ओर से मिलेंगे। मेघवाल मानेसर स्थित आइकेट  सेंटर  में आयोजित न्यू जेन मोबिलिटी समिट 2019 के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि तीन दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान अलग-अलग विषयों के विशेषज्ञों ने 100 से अधिक टेक्निकल पेपर का प्रदर्शन किया। उस दौरान जो विचार विमर्श किया गया, वास्तव में यह देश के हित में है। इससे  देश की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को साकार करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि आइकेट की ओर से आयोजित न्यू जेन मोबिलिटी सम्मिट 2019 में नेशनल आटोमोटिव बोर्ड के गठन का जो प्रस्ताव सामने आया है उस पर भारत सरकार गंभीरता से विचार करेगी। उन्होंने कहा कि ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की आवश्यकता एवं इनके अनुकूल नीतियों के निर्धारण की दृष्टि से विभिन्न मंत्रालयों के साथ सामंजस्य स्थापित करने के लिए जिस राष्ट्रीय संस्था के गठन की बात इस सम्मेलन में सामने आई है उसको लेकर वे स्वयं भी उत्साहित हैं और आइकेट के विशेषज्ञों के इस प्रस्ताव का पुरजोर वकालत करेंगे। उन्होंने आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार के समक्ष इस प्रस्ताव को रखा जायेगा।
उन्होंने कहा वीएस 4 से वीएस 6 तकनीक वाले इंजन की ओर हम निर्धारित समय सीमा के तहत स्थानांतरित होने के प्रयास में हैं। इसमें अलग अलग संस्थाओं एवं विभिन्न कंपनियों का पूरा सहयोग भी भारत सरकार को मिल रहा है । उन्होंने कहा कि इसके लिए इंडियन आयल सहित सभी आयल कंपनियों ने भी अपनी तैयारी लगभग कर ली है। केंद्र सरकार की सभी कंपनियों से भी इस मद में मदद देने के लिए आग्रह किया गया है। केंद्रीय भारी उद्योग राज्यमंत्री ने उद्यमियों को आश्वस्त किया की चौथी औद्योगिक क्रांति में जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को 5 ट्रिलियन डॉलर की आर्थिक शक्ति बनाने का लक्ष्य रखा है तो इसमें ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का भी बड़ा योगदान होगा। इसलिए ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री इस बात के लिए आश्वस्त रहे कि विकास के इस प्रयास में उन्हें भी साथ लिया जाएगा और उनके विकास लिए भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने आश्वस्त किया कि रिसर्च एंड डेवलपमेंट की दृष्टि से पैसे की कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी। केन्द्रीय मंत्री ने विशेषज्ञों की ओर से आने वाले समय में बड़े पैमाने पर पुराने वाहनों के रूप में बनने वाले ऑटोमोबाइल कचरे के निस्तारण की चिंता के प्रति सहमति जताई। उन्होंने माना कि अगले 10 से 15 साल के दौरान पुराने वाहनों की रीसाइक्लिंग करने की व्यवस्था करना भी बड़ी चुनौती होगी। इसके लिए अलग से रीसाइक्लिंग यूनिट की स्थापना करनी होगी साथ ही इतने बड़े पैमाने पर जमा होने वाले वेस्ट मटेरियल की प्लेसिंग की दृष्टि से भी जगह का चयन करना होगा। इससे पूर्व आइकेट के निदेशक दिनेश त्यागी ने अपने स्वागत भाषण में बताया कि सम्मेलन के 3 दिन में लगभग 100 से अधिक टेक्निकल रिसर्च पेपर्स प्रदर्शित किए गए। 15 से अधिक देशों के तकनीकी विशेषज्ञों एवं ऑटोमोबाइल प्रतिनिधियों ने भाग लिया और अपने अनुभव साझा किए। सम्मेलन में 200 से अधिक स्टाल पर ई - मोबिलिटी, हाइड्रो-मोबिलिटी सहित अन्य अल्टरनेटिव ऑटोमोबाइल फ्यूल से संबंधित कंपोनेंट्स एवं वाहनों का भी शानदार प्रदर्शन किया गया। समारोह को होंडा मोटर्स से यूसी मोरिया, आईओसीएल के डायरेक्टर एसएस रामकुमार, जेबीएम ग्रुप के कार्यकारी डायरेक्टर निशांत आर्या, होंडा कार्स इंडिया लिमिटेड के प्रवीण परांजपे एवं वोल्वो इंडिया लिमिटेड के चाल्र्स फ्रंप ने भी संबोधित किया।
 

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