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धर्म

श्रेष्ठ समाज के विकास में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका : मनीष सिसोदिया 

अभिनव इंडिया/रंजीता आर्या
नई दिल्ली।
वर्तमान शिक्षा नीति में मौलिक परिवर्तन की आवश्यकता है। आद्यात्मिकता के समावेश से ही बेहतर शिक्षा प्रणाली की स्थापना हो सकती है। श्रेष्ठ समाज के विकास में शिक्षा की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है। उक्त विचार दिल्ली सरकार के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने ब्रह्माकुमारीज द्वारा गुरुग्राम के आेम् शान्ति रिट्रीट सेन्टर में शिक्षाविदों के लिए आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि शिक्षा का अर्थ केवल मानव संसाधन विकसित करना नहीं, अपितु मानव को मानव से जोडऩा होना चाहिए। समाज परिवर्तन के कार्य में महिलाआें की विशेष भूमिका है। जीवन की मूल शिक्षाएं तो एक मां ही अपने बच्चे को बेहतर ढग़ से दे सकती है। शिक्षा का पहला पाठ परिवार से ही शुरू होता है और जिसका मूल आधार केवल मां है। संस्था की निदेशिका बीके आशा ने कहा कि मातृशक्ति और मातृभूमि दोनों ही स्वर्ग से भी श्रेष्ठ हैं। इसलिए दोनों का जहां सम्मान होता है, वहां पर देवता का ही वास होता है। नारी जितनी सशक्त होगी, समाज भी उतना ही शक्तिशाली बनेगा। बीके बृजमोहन ने भी कहा कि समाज में महिलाआें का सम्मान किया जाना बहुत जरुरी है। श्रेष्ठ विश्व के निर्माण में नारी शक्ति का विशेष योगदान है। बीके शिवानी ने कहा कि छोटी-छोटी बातों से मानव भावनात्मक रूप से कमजोर हो रहा है, लेकिन छोटी-छोटी चीजों के बदलाव से हम भावनात्मक रूप से मजबूत हो सकते हैं। कार्यक्रम को हरिचंद अग्रवाल डा. सविता, विधात्री और दिव्या ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में विश्व-विद्यालयों के कुलपति, प्रोफेसर, डीन, प्राचार्य, प्रवक्ता सहित बड़ी संख्या में महिलाआें ने भी भाग लिया। 
 

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