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बेटियों ने दिया मां की देह को कांधा

-92 वर्षीया द्रोपदी की देह फरीदाबाद के मेडिकल कालेज में रिसर्च को दी दान
- द्रोपदी इंसा के बेटे ताराचंद इंसा का शरीर भी किया था दान
अभिनव इंडिया/अजय शर्मा
गुरुग्राम।
रुढि़वादी समाज की सोच से ऊपर उठकर मिलेनियम सिटी गुरुग्राम के अशोक विहार फेज-3 में रहने वाले एक परिवार ने डेरा सच्चा सौदा के गद्दीनशीन संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसा की पावन प्रेरणा से बुजुर्ग माता द्रोपदी इंसा की मृत देह को मेडिकल रिसर्च के लिए ईएसआईसी मेडिकल कालेज फरीदाबाद को सौंपा। वहीं बेटियों ने देह कांधा भी दिया। रविवार 17 नवम्बर 2019 को बुजुर्ग द्रोपदी का देहांत हो गया था। अपनी उम्र के हिसाब से जीवन यात्रा को पूर्ण करके गई द्रोपदी का शरीर बेशक मृत हुआ हो, लेकिन परिवार में वे सदा जिवित रहेंगी। द्रोपदी इंसा के परिवार में चार बेटियों के अलावा पुत्र बच्चन सिंह सिंह इंसा एवं पुत्रवधू गुलशन देवी इंसा, पुत्रवधु राजस्थान में 45 मेंबर मालती इंसा पत्नी ताराचंद इंसा तथा पौत्र मोहित व सुखजीत हैं। चार बेटियों आशा, नीलम, अल्का और शोभा ने अपनी मां श्रीमती द्रोपदी की अर्थी को कंधा दिया और फिर उनकी मृत देह को मेडिकल रिसर्च के लिए सौंप दिया। इस दौरान गुरुग्राम की साध संगत काफी संख्या में मौजूद रही। शाह सतनाम सिंह जी ग्रीन एस वेल्फेयर फोर्स विंग के सेवादार अपनी वर्दी में पहुंचे और स्वर्गीय द्रोपदी देवी के पार्थिव शरीर को नमन करते हुये नमन किया।
द्रोपदी के बेटे की भी देह की थी दान:
जिस समाज में लोग किसी भी तरह का दान देने से कतराते हैं, उसी समाज में द्रोपदी के परिवार ने ऐसी गाथा लिखी है जो सदा याद रखी जायेगी। जब द्रोपदी जिवित थी तो उनके सामने ही उनके करीब 55 वर्षीय बेटे ताराचंद का देहांत हो गया था। चूंकि परिवार ने देह दान के लिए डेरा सच्चा सौदा में फार्म भरकर अपनी स्वीकृति दे रखी है। इसी के चलते ताराचंद की मृत देह भी मेडिकल रिसर्च के लिए दान दी गई। यह कार्य बहुत बड़े दिल वाला ही कर सकता है।    
बेटियों ने दिया मां की अर्थी को कंधा:
रुढि़वादी समाज की सोच से ऊपर उठकर मिलेनियम सिटी गुरुग्राम में जब बेटियों ने मां की अर्थी का कांधा दिया तो हर कोई देखता रहा। समाज में इस तरह के बदलाव को दिखाकर कोई वाहवाही नहीं लूटनी, लेकिन बदलाव जरूरी है। यहां बेटियों ने दिखा दिया कि बेटियों को बराबरी का दर्जा देने की बात करने वाले हमारे समाज में बेटियां खुद आगे बढक़र अपने को स्थापित कर रही हैं। अपनी 92 वर्षीय मां द्रोपदी की अर्थी को कांधा देकर उनकी चार बेटियों आशा, नीलम, अल्का और शोभा ने पूज्य गुरु जी के वचनों पर पुष्प चढ़ाये।
 

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