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धर्म-कर्म

अहिंसा और सत्य का बोध कराता है गीता ग्रंथ : स्वामी ज्ञानानंद

अभिनव इंडिया/परमेंद्र कौशिक
गुरुग्राम।
गीता एक धार्मिक ग्रंथ है, जिसका देश ही नहीं, अपितु विदेशों में भी सम्मान किया जाता है। गीता में कर्म को महत्व दिया गया है। हालांकि गीता ग्रंथ काफी प्राचीन है, लेकिन इसका महत्व तभी है जब हम सभी इसको अपने जीवन में आत्मसात करें। उक्त उद्गार देश के प्रमुख संत गीता मनीषी महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने जिला अदालत परिसर स्थित सर शादीलाल हॉल में अधिवक्ताआें को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि गीता हमें अहिंसा और सत्य का बोध कराती है। गीता में वर्णित युद्ध वास्तव में आत्मा के असली शत्रु काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार को मारने का प्रतीक हैं। जिस दिन हम गीता के रहस्य को समझ लेंगे, उस दिन जीवन समझ में आ जाएगा। उन्होंने अधिवक्ताओं से आग्रह किया कि आगामी एक दिसम्बर को राजधानी के लाल किला मैदान में गीता प्रेरणा महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें देश के प्रमुख संत, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संचालक मोहन भागवत, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहरलाल तथा देश के विभिन्न क्षेत्रों से 18 हजार युवक, 1800 चिकित्सक, 1800 न्यायाधीश एवं अधिवक्ता, 1800 शिक्षाविद्, 1800 सरपंच-पंच और अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधि भी भाग लेंगे। उन्होंने अधिवक्ताओं से आग्रह किया कि वे भी इस आयोजन में बढ़-चढक़र भाग लें। जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मीर सिंह यादव, महासचिव कमलजीत सिंह कटारिया, पूर्व अध्यक्ष कुलभूषण भारद्वाज व पूर्व महासचिव पंडित अरुण शर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता सुभाष ग्रोवर, कुलभूषण, सूबे सिंह यादव, जितेंद्र कौशिक आदि ने बड़ी ही गर्मजोशी के साथ गीता मनीषी का स्वागत किया। इस आयोजन में बड़ी संख्या में अधिवक्ता भी शामिल हुए। 
 

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